प्राइवेट काॅलेजों की फीस को लेकर जल्दी एक नया कानून आने वाला है

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर पिछले एक महीने से नए कानून पर काम चल रहा है। सरकार मेडिकल एजूकेशन के लिए फीस रेगुलेशन तैयार कर रही है। एमबीबीएस समेत यूजी और पीजी मेडिकल काॅलेजों में 2020 के एडमिशन नए फीस कानूनों के आधार पर ही होंगे। प्राइवेट मेडिकल काॅलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटी की मनमानी खत्म हो जाएगी।

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मंत्रालय द्वारा जल्द नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का गठन किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। उससे पहले मौजूदा कमेटी ही इस रेगुलेशन को तैयार कर रही है। इस ड्राफ्ट के आधार पर ही एनएमसी इसे कानून का रूप देगा। इसके लिए राज्य संगठनों से भी राय ली जा रही है।

सबसे बड़ा मसला है डोनेशन

दरअसल, एमबीबीएस एडमिशन में फीस सबसे बड़ा इशू है। खास तौर से प्राइवेट मेडिकल काॅलेजों में कैपिटेशन फीस की कोई सीमा नहीं है। उत्तर भारत में 50 लाख और दक्षिण भारत के काॅलेजों में एक करोड़ रुपए तक कैपिटेशन फीस मांगी जा रही है। कानून में अभी तक इसके नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं दी गई थी जिस कारण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) इस पर खामोस रहा।

जल्द तैयार होगा ड्राफ्ट

सरकार ने भी कोई दखल नहीं दिया और पूरा सिस्टम इसका हिस्सा बनता गया। इस समस्या को खत्म करने के लिए अब केंद्र सरकार द्वारा एमसीआई की मदद से फीस रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। मौजूदा एमसीआई इसे तैयार कर रही है। अगले कुछ सप्ताह बाद NMC के गठन के बाद इस ड्राफ्ट को आधार बनाकर फीस रेगुलेशन को पेश कर दिया जाएगा।

एक्ट में फीस तय करने का अधिकार: नेशनल मेडिकल कमिशन बिल-2019 का सेक्शन-10(1) के सब सेक्शन-1 यानि 10(1)(i) फीस तय करने का अधिकार देगा। एनएमसी अधिनियम के इस प्रावधान के तहत निजी मेडिकल काॅलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटी की 50 फीसदी मेडिकल सीटों पर फीस एवं अन्य शुल्क के निर्धारण के लिए दिशा निर्देश तय किए जा सकेंगे।

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