5 महान खिलाड़ी जो सही समय पर हुए थे रिटायर, नंबर 1 ने सबको चौंका दिया था

किसी भी खिलाडी के लिए रिटायरमेंट का निर्णय लेना सबसे कठिन काम होता है क्योकि यह फैसला उन्हें अपने सबसे पसंदीदा चीज़ से दूर करता है क्रिकेट के इतिहास कई खिलाडियों को सही समय पर रिटायर ना होने के कारन आलोचकों का सामना करना पड़ा है और ऐसा करते समय उनके यह बात भी ध्यान में नहीं आयी थी को वो अपना करियर लम्बा करने के चक्कर में कुछ युवा और प्रतिभाशाली खिलाडियों का नुकसान कर रहे थे

लेकिन कुछ ऐसे भी महान खिलाडी हमने देखे है जिन्होंने अपना करियर सही समय पर ख़त्म करने का फैसला लिया, या तो वो शीर्ष स्थान से रिटायर हो गए या फिर उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनका खराब प्रदर्शन लंबे समय तक नहीं चले और किसी भी तरह से टीम को प्रभावित ना करे।

आज हम ऐसे ही पांच खिलाडियों के बारे में जानेंगे जिन्होंने सही समय पर अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की:

5.कुमार संगाकारा

लगभग ३०,००० अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाले इस बाएं हाथ के विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 2015 विश्व कप के बाद रिटायर होने का अपना फैसला चयनकर्ताओं के निवेदन पर बदला था। 15 साल क्रिकेट खेलने के बाद वह वेस्टइंडीज और श्रीलंका सीरीज़ के बाद रिटायर हुए। श्रीलंका के इस सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाज ने अपने आखिरी दिनों में भी अपना जादू बनायें रखा, लेकिन उन्होंने अपना करियर उस पॉइंट तक नहीं खींचा जब वह देश के लिए उत्तरदायित्व बन सकते थे या किसी भी नौजवान के लिए बाधा बन सकते थे।

4.शेन वॉर्न

दुनिया के सबसे महान लेग-स्पिनर में से एक ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न को अपने खेल के दिनों के दौरान बहुत समस्याओं (कई ऑफ-फील्ड) से निपटना पड़ा । हालांकि, वह उन्हें मैदान पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने से कभी रोक नहीं पाया, उनकी चालाक लेग स्पिन ने कई वर्षों तक बल्लेबाजों को परेशान किया।

वह 2003 में अपने एक साल के प्रतिबंध के बाद भी पहले जितने ही अच्छे फॉर्म में थे, और 2006 में अपने पहले मैच के 14 साल बाद भी असाधारण रूप से अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे। लेकिन, उस साल एशेज को पुनः प्राप्त करने के बाद 37 साल के वॉर्न ने फैसला किया कि उनका समय ख़त्म हो चूका था।

700 टेस्ट विकेट लेने वाले पहले क्रिकेटर वॉर्न ने रिटायर होने का फैसला किया, जिससे युवाओं को मौका मिला क्योंकि तब ऑस्ट्रेलिया अपने स्वर्ण युग के अंत के बाद अपना टेस्ट सेटअप रहा था।

3.राहुल द्रविड़

भारतीय प्रशंसकों के लिए वह एक दिल टूटने वाली घटना थी जब ‘द वॉल’ राहुल द्रविड़ ने मार्च २०१२ में अचानक रिटायरमेंट की घोषणा की। कुछ ही समय पहले हुए ऑस्ट्रेलियाई दौरे में उनका प्रदर्शन बहुत ही सामान्य रहा था और उन्हें तभी इस बात का एहसास हुआ था की अब क्रिकेट से दूर होने का समय आ गया है। उस ऑस्ट्रेलियाई दौरे के बाद भारत का घरेलु सीजन शुरू होने वाला था और अगर वो चाहते तो और एक-डेढ़ साल आराम से खेल सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा ना करते हुए युवा खिलाडियों को मौका दिया जो उन युवा प्रतिभाशाली खिलाडियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।

2.एलिस्टर कुक

एलिस्टर कुक का अपने टीम को पिछले १०-१२ सालों में मिले सफलता में सबसे बड़ा योगदान था। इंग्लैंड के यह सबसे बड़े टेस्ट बल्लेबाज भारत के निराशाजनक 2016 के दौरे के बाद अपना जादू नहीं दिखा पाएं। पिछले साल के अंत में उन्होंने एशेज सीरीज में दोहरा शतक जरूर लगाया लेकिन इस साल भारत के साथ हुए श्रृंखला के बाद उन्होंने सिर्फ ३२ साल की उम्र में रिटायर होने को फैसला लिया।

1.महेंद्र सिंह धोनी (टेस्ट)

उनकी सेवानिवृत्ति कई लोगों के लिए एक झटके के रूप में आई, लेकिन धोनी ने 2015 विश्व कप से ठीक पहले 2014 में भारत-ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला के मध्य में ही रिटायर होने का फैसला किया। कोई भी नहीं जानता कि यह कदम उन्होंने इतनी जल्दबाजी में क्यों उठाया, लेकिन यह एक समझदार कदम साबित हुआ क्योंकि इसके बाद कोहली ने कप्तान और बल्लेबाज इन दोनों रूपों में चमक दिखाई। धोनी के लिए, यह अतिरिक्त बोझ कम हुआ, जिससे वह सीमित ओवरों के मैच पर ध्यान केंद्रित कर सकते थे। उन्होंने वनडे और टी 20 की कप्तानी कोहली को तुरंत नहीं सौंपी, जिससे कोहली को कप्तान की भूमिका समझने के लिए सही समय मिला।

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