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हादसा ऐसा कि जलते लोग सड़क पर भागे और कुछ पड़े तड़पते रहे, मां के साथ मासूम बेटे की भी हुई मौत

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लुधियाना.ग्यासपुरा की सम्राट कॉलोनी में सुबह करीब 6:30 बजे सिलेंडर ब्लास्ट में आला अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सिलेंडर फटने से प्रेशर के साथ निकली फायर फ्लैश ने लोगों को संभलने का मौका ही नहीं दिया। ये लोग आग बुझाने में पीड़ित परिवार की मदद के लिए जुटे थे। फायर फ्लैश की चपेट में आए कुछ लोगों की तो सेकंडों में शरीर से चमड़ी ही उतर गई। चारों ओर चीख-पुकार मची थी। सिर से पांव तक जलते लोग सड़कों-गलियों में भागे। कुछ धमाके से दूर जा गिरे और सड़क पर तड़पते रहे। इलाके के लोगों ने अपने-अपने वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। लोगों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद फोन किया गया लेकिन फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और पुलिस डेढ़ से दो घंटे लेट आई। तब तक आग बुझ चुकी थी। ऐसे हुआ हादसा…

– हादसा 58 वर्षीय अशोक यादव के घर हुआ। सुबह उनकी पत्नी सुनीता(40 वर्ष) खाना बना रही थीं। दो बेटियां पूजा(20), काजल(10) और बेटा राज(13) सो रहे थे।

– पति-पत्नी और तीनों बच्चे बुरी तरह से झुलस गए। इलाज के दौरान सुनीता और राज की मौत हो गई। अशोक का भाई धर्मेंद्र दूध लेने गया था, सुखद है कि वह कुशल है।

– ब्लास्ट इतना तेज था कि मकान में लगा लोहे का गेट उखड़कर गली में जा गिरा और कमरे की पिछली दीवार पूरी तरह से ढह गई। आसपास के दो-तीन मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

– खिड़कियों के शीशे टूट गए, दीवारों में दरारें आ गईं। एवन साइकिल्स में नौकरी करने वाले अशोक मूलरूप से यूपी के रहने वाले हैं।

170 रु. का फॉर्म भर दो, 2 लाख मुआवजा मिलेगा, घबराने की जरूरत नहीं

– राहत-बचाव में आला-अफसरों की लापरवाही सामने आई है। एडीएफओ भूपिंदर सिंह संधू, निगम जोन सी की ज्वाइंट कमिश्नर अनीता दर्शी और जोन डी के ज्वाइंट कमिश्नर कुलप्रीत सिंह घटनास्थल पर जायजा लेने पहुंचे।

– इलाके लोगों ने जब फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव टीम के देरी से पहुंचने की बात कही तो एडीएफओ ने मुआवजे की बात शुरू कर दी। कहा- गैस सिलेंडर से हादसा होने पर मुआवजा दिया जाता है। 170 रुपए का फॉर्म मिलता है, उसे भर दो। दो लाख रुपए मिल जाएगा। घबराने की जरूरत नहीं है।

– लोगों का आरोप है कि बचाव टीम समय से आती तो इतना बड़ा नुकसान न होता। लोगों की इसकी शिकायत मेयर बलकार सिंह संधू से भी। इस पर मेयर ने कहा कि वह फायर ब्रिगेड मुलाजिमों की लापरवाही की जांच कराएंगे।

एक्सपर्ट -विश्व भूषण सूद, ओनर, कुकवेल गैस
– जिस मकान में हादसा हुआ, वहां हो सकता है कि रात में गैस ठीक से बंद नहीं की गई होगी और वह लीक कर रही होगी। गैस की बदबू आने से दिन में तो लीकेज आसानी पता चल जाती है।

– रात को सोते समय अक्सर पता नहीं चल पाता है। चूल्हा जलाते समय या ऑन करने पर इलेक्ट्रिक स्विच की स्पार्किंग से आग लग सकती है।

– आग के बाद टेंपरेचर बढ़ने से सिलेंडर की गैस (एलपीजी) का भी प्रेशर बढ़ने लगता है। एक डिग्री तापमान बढ़ने से ही गैस का प्रेशर कई गुना बढ़ जाता है। जबकि आग लगने से टेंपरेचर 900 से 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसी ही स्थिति में सिलेंडर ब्लास्ट होता है। सिलेंडर फटते ही सारी गैस एक साथ प्रेशर के साथ फायर फ्लैश के रूप में निकलती है।

– यह दीवार, छत, गेट तोड़ती आसपास की चीजों को जलाती हुई निकलती है इसलिए घरों में क्रॉस वेंटीलेशन (हवा आने-जाने) की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

सेफ्टी के टिप्स आसान, जरूर अपनाएं
– डिलीवरी मैन से सिलेंडर की सील तोड़कर जरूर लीकेज चेक कराएं। इसके लिए दो तरह के टेस्ट होते हैं। डिलीवरी मैन के पास दो तरह की किट होती है एक ओरिंग टेस्टर और दूसरी लीक टेस्टर। ओरिंग टेस्टर से सिलेंडर का वॉल्व चेक किया जाता है और लीक टेस्टर से गैस लीकेज। हादसे से बेहतर है बचाव, इसलिए सिलेंडर लेने से पहले जरूर चेक कराएं। अगर डिलीवरी मैन आनाकानी करे तो एजेंसी से उसकी शिकायत कर सकते हैं।
– सिलेंडर को कभी भी लिटाकर नहीं रखें, हमेशा खड़ा करके ही इस्तेमाल कीजिए। इसीतरह चूल्हा भी जमीन पर या नीचे नहीं रखना चाहिए। किचन में पर्याप्त वेंटीलेशन होना चाहिए। वेंटीलेशन ऊपर के साथ-साथ नीचे की तरफ भी हो तो और भी अच्छा क्योंकि गैस हवा से भारी होती है। नीचे-नीचे तैरती रहती है।
– फ्रिज किचन में या उसके नजदीक नहीं रखना चाहिए। इसमें लगे ऑटो कट (थर्मोस्टेट) से स्पार्किंग होती रहती है। लीकेज की स्थिति में यह ज्यादा खतरनाक होता है। गैस की बदबू आने पर इलेक्ट्रिक स्विच ऑन-ऑफ नहीं करना चाहिए।
– इस्तेमाल के बाद बर्नर के साथ हमेशा रेग्यूलेटर की नॉब से गैस ऑफ करें। पक्की सुरक्षा चाहिए तो रेग्यूलेटर हटाकर सिलेंडर की सेफ्टी कैप लगा दें। इससे अगर सिलेंडर लीक भी करेगा तो गैस बाहर नहीं निकलेगी।
– चूल्हे में लगा सिलेंडर बंद जगह में नहीं रखना चाहिए। अगर ऐसी जगह है तो यह बैकसाइड खुली हो ताकि पर्याप्त वेंटीलेशन रहे। दूसरा भरा सिलेंडर स्टोर की बजाय हवादार जगह में रखना चाहिए।

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