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राम रहस्य से जुड़ा एक तीर्थ, जहां श्रीराम ने किया था प्रायश्चित

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क्या भगवान श्रीराम ने भी प्रायश्चित किया था? अगर किया था तो किस बात के लिए किया था? ये सवाल इसलिए क्योंकि यूपी के सुल्तानपुर में गोमती नदी के किनारे एक तीर्थ स्थल है धोपाप धाम। स्थानीय निवासियों की मान्यता के अनुसार ये वही स्थान है जहां पर भगवान श्री राम ने लंकेश्वर रावण का वध करने के पश्चात महर्षि वशिष्ठ के आदेशानुसार स्नान करके स्वयं को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त किया था। लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति गंगा दशहरे के अवसर पर यहां स्नान करता है, उसके सभी पाप गोमती नदी में धुल जाते हैं। यहां एक विशाल मंदिर भी स्थित है।

पदम पुराण के अनुसार अयोध्या का राजपाट सम्भालने के बाद श्री राम ने ब्रह्म हत्या दोष के निवारण के लिए ऋषि वशिष्ठजी से उपाय पूछा। वशिष्ठजी ने उन्हें सलाह दी की अयोध्या से पश्चिम की तरफ एक ब्रह्मावर्त पर्वत है, जिसके पास आदि गंगा गोमती की अविरल धारा बहती है। अगर श्री राम गोमती नदी के किनारे यज्ञ करें तो उन्हें गोमती नदी में स्थित उस पवित्र स्थल का पता चलेगा जहां स्नान करने से उन्हें ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति मिल जाएगी।

पदम पुराण में त्रेतायुग में कुशभवनपुर नगर का वर्णन मिलता है। अयोध्या से सौ किलोमीटर दूर कुशभवनपुर को आज सुल्तानपुर के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि त्रेता युग में कुशभवनपुर में बहती थी गोमती नदी, जो आज भी यहां मौजूद है। इसी पवित्र नदी के किनारे यज्ञ करने के लिए वशिष्ठजी ने श्री राम को सलाह दी थी, जो वर्तमान समय में सुल्तानपुर के लम्भुआ तहसील में स्थित है।

भक्तों के अनुसार सुल्तानपुर के लम्भुआ तहसील में जंगलों के बीच बहनेवाली आदि गंगा गोमती नदी भगवान श्री राम की साक्षी रही है। इस नदी का भगवान श्री राम से गहरा संबंध है। कहते हैं त्रेता युग में यही पर यज्ञ किया था श्री राम ने। मान्यता के अनुसार जब प्रभु राम ने इस गोमती नदी के किनारे यज्ञ किया तब एक काला कौवा प्रकट हुआ। पौराणिक कथा के अनुसार वशिष्ठ जी ने श्री राम से कहा कि चमत्कारिक काले कौवे को ताम्रपत्र में रखकर गोमती नदी में प्रवाहित करें। नदी में बहते हुए काले कौवे का रंग जिस जगह सफेद हो जाए, वहीं पर स्थित होगा एक पवित्र कुंड है जिसे धोपाप के नाम से जानते हैं।

मान्यता है कि वर्तमान में जहां पर मंदिर है वहीं पर वो काला कौवा सफेद हो गया था। जिसके बाद श्री राम ने यहीं पर स्नान कर के ब्रह्म हत्या दोष का प्रायश्चित किया। श्री राम के द्वारा इस स्थान पर प्रायश्चित करने के कारण ही इस जगह का नाम धोतपाप पड़ा। आगे चलकर राम भक्त धोतपाप को धोपाप तीर्थ कहने लगे।

हर साल गंगा दशहरे के पावन मौके पर लाखों रामभक्त धोपाप तीर्थ में डूबकी लगाते हैं। मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम ने ज्येष्ट महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी और दशमी तिथि के दिन इस तीर्थ धाम में स्नान करके ब्रह्म हत्या जैसे पाप से मुक्ति पाई थी, इसलिए राम भक्त इस अवसर पर दूर-दूर से आकर पवित्र गोमती में स्नान करते हैं। भक्तों की मानें तो सच्चे मन से यहां पूजा-अर्चना करनेवालों को गोमती नदी के इस जल में भगवान राम की निर्मल छवि दिखाई देती है।

सदियों से धोपाप तीर्थ से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। रामभक्तों की ऐसी मान्यता है कि गोमती नदी में स्नान करने के बाद यहां पर बने मंदिर में भगवान श्री राम और माता जानकी की पूजा-अर्चना करने से जनम-जनम के पाप से मुक्ति मिल जाती है।

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