ये है विश्व के 5 क्रिकेट कोच जिन्होंन अपनी टीम को जीरो से बनाया हीरो, नंबर 1 सबसे महान

दोस्तों किसी भी खेल में या फिर पढ़ाई में एक गुरु की जरुर ही आवश्यकता होती है। कहते हैं कि बिना गुरु के बेहतर ज्ञान संभव नहीं। आज हम आपको दुनिया के ऐसे क्रिकेट के गुरुओं को बारें में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी काबलियत के दम पर अपनी टीम के गुरु बनकर अर्श से फर्स तक पंहुचाने में कोई कसर न छोड़ी। यदि बात करें भारतीय कोच रहे गैरी कर्स्टन की जिनकी कोच पद पर रहते हुए टीम विश्वकप विजेता बनी और वहीं दूसरी तरफ कोच ग्रैग चैपल के समय में टीम में अलगाव वाली स्थित भी देखने को मिली।इन दोनों को का उदाहरण साफ ये तय करता है कि किसी भी टीम के लिए एक कोच अपनी टीम को कैसे फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक पंहुचाने सकता है। तो चलिए आज हम विश्व के पांच ऐसे दिग्ग्ज क्रिेकेट कोच के बारें में बात करते हैं।

5. बॉब वूल्मर – बात करें विश्व के बेतरीन कोच रहे बॉब वूल्मर की जोकि एक इंग्लिश क्रिकेटर थे। सबसे पहले साल 1994 में बॉब साउथ अफ्रीकी टीम के क्रिकेट कोच बने और अपने कार्यकाल के समय टीम ने 15 टेस्ट मैच खेली जिसमें से 10 में प्राप्त की। साल 2004 में वह पाकिस्ता की टीम के लिए कोच पद संभाला तो पाकिस्तान ने भारत को वनडे सीरीज में 4-2 से हराया था। इऩके कोच रहने से पाकिस्ता टीम में काभी सुधार हुए और टीम का भी मजबूत हुई। इसी वजह से बॉब को पाकिस्तान ने यहां सितारा-ए-इंतियाज से नवाजा। साल 2007 में जब पाकिस्तान टीम आयरलैंड के हाथों हर कर विश्वकप से बाहर हुई तो कुछ ही समय बाद बॉब के रहस्मय मौत की खबर सुनने को मिली थी।

4. डेव वॉटमोर – आगे बात करें तो डेव वॉटमोर एक बेहतर कोच रहे हैं। आपको बता दें कि डेव ने ऑस्ट्रेलियाई टीम में खिलाड़ी के तौर पर सिर्फ 7 टेस्ट और 1 वनडे मैच खेल सके। लेकिन कोचिंग कैरियर उनका शानदार रहा है। डेव सबसे पहले श्रीलंकाई टीम के कोच बने। डेव के कार्यकाल में श्रीलंकाई टीम ने साल 1996 का विश्वकप अपने नाम किया था। वह साल 2003 से 2007 तक बांग्लादेश की टीम के कोट के पद पर काम किये। इसी दौरान 2005 में बांग्लादेश ने टेस्ट मैच जीता था। वॉटमोर ने पाकिस्तान टीम के लिए भी अपनी सेवा दी और 2012 में एशिया कप जिताया।

3. डंकन फ्लेचर – जिम्बाब्वे को साल 1982 में ICC ट्रॉफी दिलाने वाले डंकन फ्लेचर ने सबसे पहले साल 1999 में इंग्लैंड टीम के कोच बने उनके कोच पद पर रहते हुए इंग्लैंड ने 18 साल के बाद एशेज सीरीज अपने नाम की थी। 27 अप्रैल 2011 से वह टीम इंडिया के कोच बने और उनके कार्यकाल में भारत ने 8 अंतरराष्ट्रीय सीरीज पर कब्जा जमाया।

2. गैरी कर्स्टन – गैरी कर्स्टन का नाम आते टीम इडिया का वो दौर सामने याद आने लगता है। गैरी कस्टर्न के कोच पद पर जब थे तो उस समय महेंद्र सिंह धोनी कप्तान रहे और टीम इंडिया लगातार जीत हासिल करने में सफल रही थी। गैरी कस्टर्न टीम इंडिया के सबसे भाग्यशाली कोच रहे। 1 मार्च 2008 में गैरी ने अपने कोच पद की शुरुआत की और 2011 में विश्वकप टीम इंडिया ने जीता।

1 जॉन बुकानन – क्रिकेट इतिहास में सबसे सफल और सम्मानित कोच के तौर पर माने जाने वाले जॉन क्वींसलैंड बुल्स के लिए लगभग 5 वर्ष तक कोचिंग पद पर काम किया। साल 1999 में वह ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच बने। जॉन के कार्यकाल में ऑस्टेलियाई टीम ने अंतरराष्ट्रीय मैचों को लगातार जीतकर दुनिया की सबसे शक्तिशाली टीम के रुप में जानी जाने लगी। इस दौरान टीम ने बहुत सीरीज में जीत दर्ज की। उनके कार्यकाल के दौरान ऑस्ट्रेलियया ने साल 2003 विश्वकप, 2007 विश्वकप, 2004 में भारतीय दौरे पर जीत के साथ 2006 की चैंपियंस ट्रॉफी को भी जीता। वहीं साल 2009 में वह कोलकाता नाइटराइडर्स टीम के कोच बने। 2010-11 के समय में इंग्लैंड टीम ने जॉन को एशेज सीरीज के सलाहकार के पद पर नियुक्त कर दिया था।

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