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जानें गर्भ में शिशु के अंगों का विकास कैसे होता है

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हेल्थ डेस्क: साइंस की बात करें तो जब कोई महिला गर्भवती होती हैं तो गर्भवती होने के बात महिलाओं के गर्भाशय में धीरे धीरे शिशु का विकास होता हैं। लेकिन महिलाएं इस बात को जानने के लिए उतावली होती हैं की उसके गर्भाशय में शिशु के अंगों का विकास कैसे होता हैं। आज जानने की कोशिश करेंगे इन्ही बातों के बारे में ताकि लोगों को इसके बारे में सही जानकारी मिल सके। तो आइये जानते हैं विस्तार से की गर्भ में शिशु के अंगों का विकास कैसे होता है। 
1 . जब कोई महिला गर्भवती होती हैं तब पुरुषों के शुक्राणु महिलाओं के अंडे को फर्टिलाइज करते हैं। जिससे महिलाओं के गर्भ में भूर्ण का निर्माण होता हैं और ये भूर्ण जैसे जैसे विकसित होता जाता हैं शिशु का रूप ले लेता हैं। पहले महीने में शिशु का दिल, दिमाग, सिर, रीढ़ की हड्डी और फेफड़े बनना शुरू होता हैं। यह महीना शिशु के लिए बहुत खास महीना माना जाता हैं।  
 
2 .दूसरे से तीसरे महीने में गर्भ में शिशु के आंख, कान, नाक आदि का विकास होता हैं। साथ ही साथ इसके विकास के लिए शिशु को ज़रूरी पोषक तत्वों की ज़रूरत होती हैं। इस दौरान महिलाओं को अपने सेहत पर विशेष ध्यान देनी चाहिए ताकि शिशु के अंगों के विकास में कोई बाधा उत्पन ना हो। साथ ही साथ महिलाओं को डॉक्टर की सहायता से चेकअप भी कराते रहना चाहिए। 
 
3 .चौथा माह शिशु के लिए सबसे खास माह माना जाता हैं। क्यों की इस माह में शिशु के लगभग सभी अंगों का विकास हो जाता हैं और शिशु महिलाओं के गर्भ में हलचल करने लगता हैं। चौथे महीने में शिशु के पैर और हाथ भी विकसित हो जाते हैं। इस समय गर्भ में विकसित हो रहें शिशु को प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम की ज़रूरत सबसे अधिक होती हैं। इसलिए महिलाएं इस समय अपने खान पान पर विशेष ध्यान दें। 
 
4 .सांतवा और आठवां माह शिशु के लिए बहुत महत्पूर्ण होता हैं। इस माह में शिशु के सिर पर बाल आते हैं और शरीर पर चर्बी आने लगता हैं। साथ ही साथ शिशु का चेहरा नवजात शिशु की तरह दिखाने लगता हैं। इस समय शिशु आपकी बातों को सुन सकता हैं और गर्भ में हलचल भी कर सकता हैं। इस माह में शिशु के नाख़ून भी निकल आते हैं। इस तरह महिलाओं के गर्भ में शिशु के अंगों का विकास होता हैं। 

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