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चंबल के बीहड़ों के बीच एक रहस्यमई किला, जहाँ 24 घंटे टपकता था खून

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चंबल के बीहड़ों के बीच एक रहस्यमई किला, जिसके साथ जुड़ी है कई कहानियां।कहानियां तिलिस्म उनकी और खजाने की चंबल की लहरों के पास यह किला गवाह है। एक विरासत का जिससे अभी ज्यादा लोग वाकिफ नहीं है। जी हां हम बात कर रहे हैं चंबल के अटेर के किले कि। वह किला जहाँ सदियों तक भदावर राजाओं ने शासन किया ।इसी वंश के साथ जुड़ा है रहस्य जो अटेर के किले को और भी खास बनाता है।

अटेर का किलासैकड़ो किवदंती कई सौ हिस्सों और ना जाने कितने ही रहा कुछ उपाय वह चुपचाप खड़ा दिखाई देता है।जैसे मानो अभी उसके गर्त में और भी रहस्य हैंं। महाभारत में जिस देवगिरी पहाड़ी का उल्लेख आता है या किला ऊंची पहाड़ी पर स्थित है ।इसका मूल नाम देव गिरी दुर्ग है।

इस लिहाज से यह किला और भी खास हो जाता है।किले में सबसे चर्चित है यहां का खूनी दरवाजा। आज भी इस दरवाजे को लेकर किवदंतियां जिलेभर में प्रचलित है। खूनी दरवाजे का रंग भी लाल है इस पर ऊपर वह स्थान आज भी चिन्हित है जहां से खून टपकता था। इतिहासकार और स्थानीय लोग बताते हैं कि दरवाजे के ऊपर भेेेड़ का सिर काट कर रखा जाता था ।

भदावर राजा लाल पत्थर से बने दरवाजे के ऊपर का सिर काट कर रख देते थे। दरवाजे के नीचे एक कटोरा रख दिया जाता था इस बर्तन में खून टपकते रहते थे ।गहरी चंबल नदी की घाटी में स्थित भिंड जिले से 35 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। चंबल नदी के किनारे बना यह दुर्ग भदावर राजाओं के गौरवशाली इतिहास की कहानी बयां करती है ।राजाओं के इतिहास में इस किले का बहुत महत्व है या हिंदू और मुगल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।

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