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घाटी में फुटबॉल: आतंक के साए में पलते सपने

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अमित कुमार, नई दिल्ली
वह अकसर अपने घर से कुछ दूरी हो रही गोलीबारी, पत्थरबाजी और धमाकों की आवाज सुनते रहते थे। हालात ऐसे कि घर से बाहर निकलने पर भी डर लगे। लेकिन वे कदम नहीं रुके। पैरों का जादू पहले घाटी के लोगों ने देखा, अब सारा हिंदुस्तान देखेगा। बात शाहनवाज बशीर की हो रही है। बशीर कश्मीर के फुटबॉल खिलाड़ी हैं, जो जल्द ही आईलीग में खेलते नजर आएंगे।

बशीर एक मिड-फील्डर हैं। वह रियल कश्मीर से खेलते हैं। यह आई-लीग में खेलने वाली पहली टीम है। श्री नगर की सिर्फ दो साल पुरानी यह टीम इस साल अपना आई-लीग डेब्यू करेगी। लगातार मजबूत होती टीम बहुत तेजी से अपनी पहचान बना रही है। टीम को एडिडास जैसी बड़ी कंपनी किट स्पॉन्सर कर रही है। हालांकि खिलाड़ियों की कहानी बताती है कि बंदूकों के साए में अपने जोश को बनाए रखना कितना मुश्किल होता है।

बशीर श्री नगर के लाल चौक से कुछ ही दूरी पर रहते हैं। लाल चौक हमेशा से ही सुरक्षा के कड़े घेरे में रहता है। कमांडो और सुरक्षाबल हमेशा यहां गश्त लगाते रहते हैं। कभी बम धमाके, कभी गोलीबारी, कभी पत्थरबाजी या फिर कुछ और। आए दिन कुछ न कुछ परेशानी यहां के इलाके लोगों का हिस्सा हो चुकी है लेकिन इसमें से कुछ भी बशीर को उसके सपनों को पूरा करने से नहीं रोक पाया।

बशीर ने एक टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा, ‘हां, मैं अकसर गोलियों और धमाकों की आवाज सुनता था। कर्फ्यू के दौरान फुटबॉल मैदान पर पहुंचने के लिए मैंने और मेरे दोस्तों ने एक नया रास्ता खोजा था। हम सिर्फ अपना ख्वाब पूरा करना चाहते थे।’

बशीर का सपना ही उसके पिता का भी सपना है। वह खुद भी फुटबॉल खेला करते थे।

बशीर ने बताया, ‘जिंदगी बहुत मुश्किल भरी है लेकिन मैं तय कर चुका था कि मुझे जानामाना फुटबॉलर बनना है। मैं वह करना चाहता हूं जो मेरे पिता नहीं कर पाए। उन्होंने मुझे फुटबॉलर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की।’

बशीर के पिता कुकिंग गैस का बिजनस करते हैं। वह हमेशा से अपने खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहते थे लेकिन पारिवारिक परेशानियों के चलते वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाए।

बशीर 13 साल के थे जब उनके पिता उन्हें फुटबॉल के मैदान पर लेकर आए। उन्होंने बशीर को फुटबॉल अकादमी में दाखिला दिला दिया। उनका सपना था कि एक दिन उनका बेटा देश के लिए खेलेगा।

बशीर कहते हैं, ‘मेरे पिता को फुटबॉल की बहुत गहरी समझ है। वह हमेशा मुझे निर्देशित करते रहते हैं।’

बशीर कहते हैं, ‘मेरे पिता हमेशा कहते हैं- देश के लिए खेलना है तुझे एक दिन।’

अपनी टीम के बारे में बशीर कहते हैं, ‘हमारे पास प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। हर खिलाड़ी मैच का रुख बदल सकता है। हम सिर्फ अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं। हमारी तैयारी अच्छी है।’

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