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क्योँ है आंकड़े के पौधे में भगवान गणेश का वास

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माना जाता है कि आंकड़े के पौधे में भगवान गणेश का वास होता है. इसलिए इसकी जड़ शुभ और पवित्र होकर श्री यानी, सुख-समृद्धि देने वाली मानी जाती है. तंत्र क्रियाओं में सफेद आंकड़ा की जड़ से निर्मित श्रीगणेश का विशेष महत्व है. इसे श्वेतार्क गणपति भी कहते हैं. कई टोने-टोटकों में श्रीगणेश के इस स्वरूप का उपयोग किया जाता है. श्वेतार्क गणपति को घर में स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करने पर घर में किसी ऊपरी बाधा का असर नहीं होता.

सफेद आक के फूलों से शिव पूजन करें, भोले बाबा की कृपा होगी.

आक की जड़ रविपुष्य नक्षत्र में लाल कपड़े में लपेटकर घर में रख लें, घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी.
श्वेतार्क वृक्ष के नीचे बैठकर प्रतिदिन ‘ऊँ गं गणपतये नमः’ की एक माला जप करें, हर क्षेत्र में लाभ मिलेगा.
श्वेतार्क की जड़, गोरोचन तथा गोघृत में घिसकर तिलक किया करें, वशीकरण तथा सम्मोहन में इससे त्वरित फल मिलेगा.

श्वेतार्क से गणपति की प्रतिमा बनाकर घर में स्थापित करें. नित्य एक दूर्वाघास अर्पण कर श्रद्धापूर्वक गणपति जी का ध्यान किया करें, प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी तथा सब प्रकार के विघ्नों से आपकी रक्षा होगी.
श्वेतार्क के पत्ते पर अपने शत्रु का नाम इसके ही दूध से लिखकर जमीन में दबा दिया करें, वह शांत रहेगा. इस पत्ते को जल प्रवाह कर दें तो शत्रु आपको छोड़कर और कहीं चला जाएगा. इस पत्ते से यदि होम करते हैं तब तो शत्रु का भगवान ही मालिक है.

श्वेतार्क के फल से निकलने वाली रुई की बत्ती तिल के तेल के दीपक में जलाकर लक्ष्मी साधनाएँ करें, माँ की आप पर कृपा बनी रहेगी .

श्वेतार्क की जड़, मूंगा, फिटकरी, लहसुन तथा मोर का पंख एक थैली में सिल लें. यह एक नजरबट्टू बन जाएगा. बच्चे के सोते समय चौंकना, डरना, रोना आदि में यह बहुत लाभदायक सिद्ध होगा.

सफेद आक की जड़, गणेश चतुर्थी से अनन्त चतुर्दशी तक नित्य ‘ऊँ गं गणपतये नम’ मंत्र से पूजा करें, सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होगी तथा मनोवांछित कामनाएं पूर्ण होंगी.

श्वेतार्क व़ृक्ष पर नित्य ‘ऊँ नमो विघ्नहराय गं गणपतये नमः’ मंत्र जप करते हुए मिश्रित जल से अर्ध्य दिया करें, दुष्ट ग्रह शांत होंगे.

मिश्रित चावल के आसन पर श्वेतार्क गणपति जी को विराजमान कर लें. हल्दी, चन्दन, धूप, दीप, नैवेद्य से देव की पूजा करें. नित्य गणपति स्तोत्र का पाठ किया करें, धन-धान्य का अभाव नहीं रहेगा.
श्वेतार्क की जड़ ‘ऊँ नमो अग्नि रूपाय ह्रीं नमः’ मंत्र जपकर पास रख लें, यात्रा में दुर्घटना का भय नहीं रहेगा.

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