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अगर अचानक ही तेज हो जाती है आपकी दिल की धड़कन, तो ये है इसका कारण

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दिल हमारे शरीर का सबसे जरूरी हिस्सा है। दिल हमारे शरीर में खून को पंप करने का काम करता है। दिल का धड़कना हमारे लिए बहुत जरूरी है क्योंकि दिल धड़कने से ही हमारे शरीर में जान बाकी है। कई बार दिल की धड़कन घटना-बढ़ना देखा जा सकता है, ऐसा हमारे शरीर में किसी गड़बड़ी के कारण हो सकता है। दिल की धड़कन बार-बार घटने या बढ़ने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ये समस्या पूरे शरीर को नुक्सान पहुंचा सकती है। आईए जानते हैं इसके बारे में।

क्या होता है इनएप्रोप्रियेट साइनस टेकिकार्डिया

इनएप्रोप्रियेट साइनस टेकिकार्डिया एक तरह की समस्या है जो दिल से संबंधित है। टेकिकार्डिया दिल की आम प्रतिक्रिया से संबंधित है। अक्सर बुखार, खून का बहाव या थकावट वाली एक्टिविटी करने से दिल की धड़कन तेज हो जाती है। ये समस्या कई बीमारियों के कारण भी हो सकती है जैसे थाइरोइड, हाइपरथाइरोइडिज्म आदि। निमोनिया बीमारी में भी सांस लेने में दिक्कत होने के कारण टेकिकार्डिया की समस्या हो सकती है।

ये है टेकिकार्डिया का कारण

इस बात का अभी तक पता नहीं चल पाया है कि इनएप्रोप्रियेट साइनस टेकिकार्डिया किस कारण से होता है। इसमें दिल की धड़कन बिना किसी वजह के तेज हो जाती है, इसमें दिल की धड़कन 100 बीट प्रति मिनट से ऊपर भी चली जाती है। अगर किसी को टेकिकार्डिया की समस्या है तो लगभग 24 घंटे के अंदर मोनिटरिंग द्वारा आईएसटी की पहचान की जा सकती है। आईएसटी से पीड़ित व्यक्ति की हार्टबीट रोजाना 100 बीट प्रति मिनट से ज्यादा होती है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को बिस्तर पर लेटने के बाद अपनी हार्टबीट नार्मल लगने लगती है। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति को सोने के दौरान अपनी हार्टबीट कम लगती है, जबकि देखा गया है कि हार्टबीट 130 तक होती है।

ये है इस समस्या का इलाज

इनएप्रोप्रियेट साइनस टेकिकार्डिया एक ऐसी समस्या है जो लंबे समय तक बनी रहती है। इस समस्या से पीड़ित को शारीरिक श्रम से बचना चाहिए। इस समस्या का इलाज ओपन हार्ट सर्जरी या दवाइयों के द्वारा किया जाता है। इस समस्या में सर्जरी की जरूरत पड़ना बहुत कम देखा गया है, ज्यादातर दवाइयों से ही इस समस्या का इलाज किया जाता है।

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