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वास्तु अनुसार 5 वस्तुओं से सजाएं दरवाजे, तो होंगे अनेक फायदे

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घर का दरवाजा ही हमारी सुख, समृद्धि और शांति के द्वार खोलता है। यह टूटा फूटा, एक पल्ले वाला, त्रिकोणाकार, गोलाकार, वर्गाकार या बहुभुज की आकृति वाला, दरवाजे के भीतर वाला दरवाजा, खिड़कियों वाला दरवाजा आदि नहीं होना चाहिए।

1. बंदनवार :

मुख्य द्वार में आम, पीपल, अशोक के पत्तों का बंदनवार लगाने से वंशवृद्धि होती है। वंदनवार इस बात का प्रतीक है कि देवगण इन पत्तों की भीनी-भीनी सुगंध से आकर्षित होकर घर में प्रवेश करते हैं।

2. मांडना :

मांडना को ‘चौंसठ कलाओं’ में स्थान प्राप्त है। इसे अल्पना भी कहते हैं। द्वार के सामने और द्वार की दीवार पर आसपास यह बनाया जाता है। इससे घर-परिवार में मंगल रहता है। मांडने की पारंपरिक आकृतियों में ज्यॉमितीय एवं पुष्प आकृतियों के साथ ही त्रिभुज, चतुर्भुज, वृत्त, कमल, शंख, घंटी, स्वस्तिक, शतरंज पट का आधार, कई सीधी रेखाएं, तरंग की आकृति आदि मुख्य हैं। यह घर में सुख समृद्धि के साथ ही उत्साह का संचार करती है।

3.पंचसूलक और सातिया :

पंचसूलक पांच तत्वों की प्रतीक खुली हथेली की छाप को पंचसूलक कहते हैं। इसे द्वार के आसपास बनाया जाता है। इसी के साथ सातिया अर्थात स्वस्तिक बनाया जाता है। सौभाग्‍य के लिए इस प्रतीक का उपयोग और महत्व शास्त्रों में बताया गया है।

4. गणेश आकृति :

भगवान गणेशजी की मूर्ति या उनकी आकृति को द्वार के बाहर ऊपर चित्रित या अंकित किया जाता है। यदि बाहर कर रहे हैं तो द्वार के भीतर उपर भी यही करना जरूरी है। इससे घर में किसी भी प्रकार की आर्थिक परेशानी नहीं होती है और घर की सुरक्षा भी बनी रहती है।

5. देहली हो सुंदर और मजबूत :

द्वार की देहली (डेली) बहुत ही मजबूत और सुंदर होना चाहिए। मंगलिक अवसरों पर भगवान का पूजन करने के बाद अंत में देहली की पूजा की जाती है। देहली के दोनों ओर सातिया बनाकर उसकी पूजा करें। सातिये के ऊपर चावल की एक ढेरी बनाएं और एक-एक सुपारी पर कलवा बांधकर उसको ढेरी के ऊपर रख दें। इस उपाय से धनलाभ होगा।

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