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अमेरिका का काला सच्च, सिर्फ 10 मिनट में मासूम को सुनाई इलेक्ट्रिक चेयर की सजा, जाने..

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तस्वीरें ब्लैक एंड वाइट हैं। फटी टी-शर्ट और छाती पर 260 कैदी नंबर लटकता हुआ 14 साल के जॉर्ज स्टिनने का हैं। जॉर्ज को गौर से दिल और दिमाग में उतार लिजिए क्योंकि ये मासूम अमेरिकी इतिहास में सबसे छोटी उम्र में इलेक्ट्रिक चेयर से मौत की सजा पाने वाला पहला शख्स था। उसे ये दर्दनाक सजा अपने काले रंग के होने की वजह से मिली थी। आइए बताते हैं आपको पूरा मामला..

23 मार्च 1944 का दिन रोज की तरह दोपहर की धूप सिर पर चिलचिला रही थी। ठीक उसी वक्त दो अस्वस्थ लड़कियां किसी खास पुल की तलाश में जॉर्ज के घर के पास आते हैं। 14 साल का जॉर्ज, 11 साल की बेट्टी और 8 साल की मैरी ऐमा थॉमस। तीनों के बीच पुल को लेकर कुछ देर तक बातें चलती हैं। जॉर्ज ने उस खास पुल के बारें में बताते हुए रेलवे पटरी की ओर इशारा किया और कुछ देर बाद जॉर्ज अपने भाई, बहनों के साथ खेलने लगा।

लेकिन साउथ कैलिफोर्निया की पुलिस को एक कॉल आती हैं। आवाज आती हैं की उनकी दो बेटियां यानि बेट्टी और मैरी कहीं खो चुकी हैं और उन्हें जल्द से जल्द ढूंडा जाए। पुलिस आस-पास के इलाके में बहुत तेजी से खोजबीन करती हैं लेकिन सफलता नहीं मिल पाती हैं। तभी पुलिस को खबर मिलती हैं की आखिरी बार जॉर्ज के साथ दो लड़कियों को देखा गया था। पुलिस जब जॉर्ज से पूछताछ करती हैं तो जॉर्ज बताते हैं की हां मैने दो लड़कियों को रेलवे पटरियों की तरफ भेजा था।

जैसे ही पुलिस रेलवे ट्रैक के पास पहुंचती हैं तो दिखता हैं की 11 साल की बेट्टी और 8 साल की मैरी ऐमा की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई हैं। फिर क्या था पुलिस ने अपनी गाड़ी पीछे कर जॉर्ज को गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं जॉर्ज से ये भी कबूल करवाया की ये दोनों खून उसी ने किए हैं। लेकिन जो साबूत कोर्ट में पैश किए गए थे उस डॉक्यूमेंट में जॉर्ज का कोई भी सिग्नेचर नहीं था।

हैरानी तो तभ हुई जब कैलीफोर्निया की कोर्ट के जज ने महज 10 मिनट में 14 साल के बच्चे को ऐसे गुनाह का अपराधी माना जो उसने कभी किया ही नहीं था। फिर 16 जून 1944 की सुबह 7:00 बजे 5 फिट 1 इंच के जॉर्ज को इलेक्ट्रिक चेयर से बांध दिया जाता हैं। उसे 2400 बोल्ट के कई छटके दिए जाते हैं और सुबह की पहली किरण के साथ मौत ने जॉर्ज को आवास में ले लिया था।

लेकिन 70 साल बाद कैस दुबारा खुलता हैं। 2014 में कैस वापस खुला और एक अहम बात का खुलासा हुआ की जॉर्ज की बहन भी उस वक्त वहां मौजूद थी। जब कोर्ट के जज ने जॉर्ज के बहन से सवाल करा तो बहन ने बताया जॉर्ज उस समय मेरे साथ था हम खेल रहे थे। दरअसल, 1944 में अमेरिका में नक्सलवादी अपने चरम सिमा में था इसलिए पुलिस ने अपने नाकामी को छिपाने के लिए जॉर्ज को अपना निशाना बनाया। बच्चा होने की वजह से और सही, गलत पता ना होने की वजह से जॉर्ज आवाज नहीं उठा सकता था। इतना कुछ सुनने के बाद आखिरकार साउथ कैलिफोर्निया की कोर्ट ने जॉर्ज को निर्दोष पाया।

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